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स्वास्थ्य मंत्रालय का फिर उड़ा मज़ाक, कहा फल खाने से ठीक हो जाता है डिप्रेशन

स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से किए गए एक ट्वीट में डिप्रेशन को बेहद ही आम सा मूड स्विंग बताया गया.

स्वास्थ्य मंत्रालय का फिर उड़ा मज़ाक, कहा फल खाने से ठीक हो जाता है डिप्रेशन

अवसाद पर स्वास्थ्य मंत्रालय के ट्वीट की हुई आलोचना

स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से किए गए एक ट्वीट में डिप्रेशन को बेहद ही आम सा मूड स्विंग बताया गया. ट्वीट में लिखा गया डिप्रेशन मन के थोड़ा निराश होने की दशा है जो व्यक्ति के विचार, व्यवहार और अच्छा होने की भावना एवं संवेदना को प्रभावित करती है. व्यक्ति को कुछ ऐसे क्रियाकलाप अवश्य ही करना चाहिए जिससे अवसाद (Depression) से निपटने में उसका मनोबल ऊंचा हो. इस ट्वीट के साथ एक पोस्टर भी अपलोड किया जिसमें लिखा हुआ था कि डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति फल खाने, स्वच्छ रहने, टहलने, योग करने, मल्टी-विटामिन खाने, यात्रा करने और सकारात्मक सोचने जैसे काम करने से ठीक हो सकता है. 
स्वास्थ्य मंत्रालय के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराज़गी जाहिर की और सभी ने इस पोस्ट को डिप्रेशन रोग को हल्के में लेने की बात कही. एक ट्विटर यूज़र ने लिखा डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति सकारात्मक सोच नहीं सकता, यह अवसाद यानी डिप्रेशन की परिभाषा है. लेकिन उसे सकारात्मक सोचने के लिए कहना, ऐसा ही है कि मोतियाबिंद वाले व्यक्ति से कहा जाए कि आंखे खुली रखे और स्पष्ट देखें. 

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Comments वहीं एक और ट्विटर यूज़र सुधीर कोठारी ने कहा कि डिप्रेशन वाकई एक बीमारी है और उसका इलाज उपलब्ध है. इलाज नहीं होने पर कई बार रोगी आत्महत्या भी कर लेता है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक डिप्रेशन आम मानसिक रोग है जिसमें व्यक्ति लगातार उदास रहता है और वह आम तौर पर उन कामों को नहीं करता है जिसमें उसे खुशी मिलती है और रोजमर्रा का भी काम नहीं करता है.
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