
चेहरे पर झुर्रियां बुढ़ापे की नहीं इस एक चीज़ की हैं निशानी
नई दिल्ली:
यूं तो झुर्रियां बढ़ती उम्र की निशानी होती हैं लेकिन हाल ही में हुई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि हंसने के दौरान जिन लोगों की आंखों के आसपास झुर्रियां पड़ती हैं उन्हें लोग ज्यादा ईमानदार समझते हैं.
रिसर्चरों के मुताबिक हमारा दिमाग इस प्रकार का होता है कि वह आखों के आस-पास झुर्रियों को बेहद प्रचंड और बेहद ईमानदार भाव के तौर पर लेता है. आखों के पास झुर्रियों को ड्यूकेन मार्कर कहते हैं और तमाम तरह की भावनाओं को व्यक्त करने पर यह उभर कर सामने आते हैं जैसे मुस्कुराने, दर्द और दुख के दौरान.
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शोधकर्ता यह जानना चाहते थे कि हमारा मस्तिष्क किस भाव को ज्यादा अहम समझता है. शोधकर्ता जूलिओ मार्टिनेज ट्रुजिलो ने बताया कि ड्यूकेन मार्कर वाली अभिव्यक्ति ज्यादा प्रभावशाली पाई गई. इस लिए भाव जितने प्रबल होंगे आपका मस्तिष्क लंबे समय तक उसे याद रखता है और ड्यूकेन मार्कर वाले चेहरे को मस्तिष्क ज्यादा ईमानदार मानता है.
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